Romantic hindi love story , प्यार की कहानी हिंदी

 बारिश वाली लड़की

Romantic hindi love story

उस शाम बारिश कुछ ज्यादा ही हो रही थी। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और सड़क पर पानी लगातार बढ़ता जा रहा था। कॉलेज की छुट्टी होते ही ज्यादातर लोग अपने घर निकल चुके थे, लेकिन आरव अब भी कॉलेज के गेट के पास खड़ा था। उसके पास छाता नहीं था और बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी।

तभी उसके पास एक लड़की आकर रुकी। उसके हाथ में नीले रंग का छाता था और चेहरे पर एक हल्की-सी मुस्कान थी। उसने आरव को देखकर कहा, “अगर तुम इसी तरह बारिश रुकने का इंतजार करते रहे तो शायद आज घर नहीं पहुँच पाओगे।”

आरव मुस्कुराया और बोला, “तो फिर मेरे पास दूसरा रास्ता भी क्या है?”

लड़की ने अपना छाता थोड़ा उसकी तरफ किया और कहा, “जहाँ तक मेरा रास्ता है, वहाँ तक साथ चल सकते हो।”

आरव ने उसकी तरफ देखा और पहली बार उसका नाम पूछा। लड़की ने कहा, “मीरा।”

उस दिन दोनों पहली बार मिले थे, लेकिन शायद किस्मत ने उनकी मुलाकात बहुत पहले लिख दी थी।

दोनों एक ही छाते के नीचे चलने लगे। रास्ते में उनकी छोटी-छोटी बातें शुरू हो गईं। पहले कॉलेज की बातें हुईं, फिर पढ़ाई की और देखते ही देखते दोनों अपने सपनों के बारे में बात करने लगे। आरव को हैरानी हो रही थी कि वह एक अनजान लड़की से इतनी आसानी से बातें कर रहा था।

कुछ दूर चलने के बाद मीरा का रास्ता अलग हो गया। उसने छाता बंद किया और कहा, “मेरा घर इस तरफ है। कल कॉलेज में मिलते हैं।”

आरव ने मुस्कुराकर पूछा, “कल मिलोगी?”

मीरा ने कहा, “हाँ, अगर तुम फिर से बारिश में फँसे तो शायद तुम्हें फिर छाता देना पड़ेगा।”

यह कहकर वह हँसते हुए चली गई।

अगले दिन आरव कॉलेज पहुँचा तो उसकी नजर सबसे पहले मीरा को ढूंढने लगी। कुछ देर बाद वह लाइब्रेरी के बाहर दिखाई दी। आरव उसके पास गया और पूछा, “कल बारिश में घर ठीक से पहुँच गई थीं?”

मीरा हँसते हुए बोली, “हाँ, लेकिन मुझे लगा था कि तुम आज कॉलेज ही नहीं आओगे।”

“क्यों?”

“क्योंकि कल तुम्हें बारिश में छोड़कर आई थी।”

दोनों हँस पड़े।

उस दिन से उनकी दोस्ती शुरू हो गई।

समय के साथ दोनों एक-दूसरे के काफी करीब आने लगे। कॉलेज में लोग उन्हें अक्सर साथ देखते थे। कभी दोनों कैंटीन में चाय पीते, कभी लाइब्रेरी में पढ़ाई करते और कभी कॉलेज खत्म होने के बाद बिना किसी खास वजह के काफी देर तक घूमते रहते।

आरव को धीरे-धीरे मीरा की आदत हो गई थी। उसे पता था कि मीरा को बारिश बहुत पसंद है, उसे चाय में कम चीनी अच्छी लगती है और जब वह परेशान होती है तो ज्यादा बात करने के बजाय चुप रहना पसंद करती है।

मीरा भी आरव को अच्छी तरह समझने लगी थी। वह जानती थी कि आरव बाहर से शांत दिखता है, लेकिन उसके अंदर बहुत सारे सपने हैं। वह अपने परिवार के लिए कुछ बड़ा करना चाहता था और अपने माता-पिता को एक दिन अपने ऊपर गर्व महसूस करवाना चाहता था।

एक शाम दोनों कॉलेज की छत पर बैठे थे। बारिश अभी-अभी रुकी थी और आसमान में हल्की धूप दिखाई दे रही थी। मीरा ने अचानक पूछा, “आरव, अगर तुम्हें जिंदगी में अपनी कोई एक इच्छा पूरी करने का मौका मिले तो तुम क्या मांगोगे?”

आरव कुछ देर सोचता रहा और फिर बोला, “मैं चाहता हूँ कि मेरे माता-पिता को कभी मेरी वजह से चिंता न करनी पड़े।”

मीरा मुस्कुराई और बोली, “तुम बहुत अच्छे हो।”

आरव ने उसकी तरफ देखा और कहा, “और तुम?”

मीरा ने कुछ देर आसमान की तरफ देखा और बोली, “मैं चाहती हूँ कि मेरी जिंदगी में ऐसा कोई इंसान हो जिसके साथ मुझे खुद को बदलने की जरूरत न पड़े।”

आरव कुछ नहीं बोला, लेकिन उस दिन उसके मन में एक बात साफ हो गई थी। वह मीरा को पसंद करने लगा था।

धीरे-धीरे उसकी दोस्ती प्यार में बदल गई थी।

लेकिन आरव ने कभी अपने दिल की बात मीरा से नहीं कही। उसे डर था कि कहीं उसका इजहार उनकी खूबसूरत दोस्ती को खराब न कर दे।

फिर एक दिन अचानक सब कुछ बदल गया।

मीरा लगातार तीन दिनों तक कॉलेज नहीं आई। आरव ने उसे फोन करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। चौथे दिन जब मीरा कॉलेज आई तो उसके चेहरे पर पहले वाली खुशी नहीं थी।

आरव ने पूछा, “क्या हुआ?”

मीरा ने कुछ देर चुप रहने के बाद कहा, “मेरे पापा का ट्रांसफर हो गया है। हमें अगले महीने दूसरे शहर जाना है।”

आरव कुछ बोल नहीं पाया।

जिस बात का उसे डर था, वही उसके सामने आ गई थी।

मीरा के जाने की तारीख धीरे-धीरे करीब आने लगी। दोनों पहले से ज्यादा समय साथ बिताने लगे, लेकिन दोनों के बीच एक अजीब-सी खामोशी भी रहने लगी थी। दोनों जानते थे कि वक्त उनके हाथ से निकल रहा है।

आखिरकार मीरा के जाने का आखिरी दिन आ गया।

शाम को दोनों उसी बस स्टॉप पर मिले जहाँ उनकी पहली मुलाकात हुई थी। आसमान में फिर बादल थे और हल्की बारिश शुरू हो चुकी थी।

आरव अपने साथ एक छोटा-सा पैकेट लेकर आया था। उसने वह पैकेट मीरा को दिया।

मीरा ने पूछा, “ये क्या है?”

“खोलकर देखो।”

पैकेट के अंदर एक छोटा-सा नीला keychain था, जिस पर बारिश की एक बूंद बनी हुई थी।

मीरा कुछ देर उसे देखती रही।

फिर उसने कहा, “तुम्हें वो पहला दिन अभी तक याद है?”

आरव ने कहा, “वो दिन मैं कभी नहीं भूल सकता।”

कुछ देर दोनों चुप रहे।

फिर आरव ने आखिरकार अपने दिल की बात कह दी।

“मीरा, मुझे तुमसे कुछ कहना है। शायद मुझे ये बात बहुत पहले कह देनी चाहिए थी, लेकिन मैं डरता था कि कहीं तुम्हें खो न दूँ।”

मीरा चुपचाप उसकी तरफ देखती रही।

आरव ने कहा, “मुझे तुमसे प्यार है। मुझे नहीं पता हम आगे कितने दूर होंगे, कितने साल बाद मिलेंगे या जिंदगी हमें कहाँ ले जाएगी, लेकिन मैं इतना जानता हूँ कि तुम मेरे लिए सिर्फ एक दोस्त नहीं हो।”

मीरा की आँखों में आँसू आ गए।

आरव ने सोचा शायद उसने सब कुछ खराब कर दिया।

लेकिन मीरा मुस्कुराई और बोली, “तुमने बहुत देर कर दी।”

आरव ने हैरानी से पूछा, “क्यों?”

मीरा ने कहा, “क्योंकि मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ।”

आरव के चेहरे पर पहली बार ऐसी मुस्कान आई जिसे वह छिपा नहीं पाया।

दोनों कुछ देर तक बारिश में खड़े रहे।

तभी मीरा की बस आ गई।

जाने से पहले उसने आरव से कहा, “एक वादा करो।”

आरव ने पूछा, “क्या?”

मीरा ने कहा, “बारिश से कभी नाराज मत होना।”

आरव ने पूछा, “क्यों?”

मीरा मुस्कुराई और बोली, “क्योंकि अगर उस दिन बारिश नहीं होती तो शायद हम कभी मिलते ही नहीं।”

बस चली गई और आरव उसे जाते हुए देखता रहा।

अगले कुछ महीने दोनों के लिए आसान नहीं थे। शुरुआत में रोज बात होती थी। फिर पढ़ाई और काम की वजह से बातचीत कम होने लगी। कभी कई दिनों तक बात नहीं होती और कभी कई हफ्ते निकल जाते।

एक समय ऐसा आया जब दोनों की बातचीत पूरी तरह बंद हो गई।

लेकिन आरव ने मीरा को कभी भुलाया नहीं।

चार साल बीत गए।

आरव की जिंदगी काफी बदल चुकी थी। उसने नौकरी शुरू कर दी थी और अपने परिवार की जिम्मेदारियों में व्यस्त हो गया था। लेकिन बारिश होते ही उसे हमेशा वही नीला छाता और वह पहली मुलाकात याद आ जाती थी।

एक दिन अचानक वह उसी पुराने शहर में वापस आया।

शाम को बारिश शुरू हो गई।

आरव को पता नहीं क्यों उसी पुराने बस स्टॉप पर जाने का मन हुआ।

वह वहाँ पहुँचा तो बहुत कुछ बदल चुका था। आसपास की दुकानें बदल गई थीं, सड़क बदल गई थी, लेकिन बस स्टॉप अभी भी वहीं था।

आरव कुछ देर वहीं खड़ा रहा।

तभी पीछे से एक जानी-पहचानी आवाज आई।

“अगर ऐसे ही खड़े रहे तो बारिश रुकने तक रात हो जाएगी।”

आरव ने धीरे से पीछे मुड़कर देखा।

उसके सामने मीरा खड़ी थी।

हाथ में वही नीला छाता था।

दोनों कुछ सेकंड तक एक-दूसरे को देखते रहे।

फिर मीरा मुस्कुराई और बोली, “अब भी बारिश पसंद नहीं है?”

आरव ने मुस्कुराकर कहा, “अब तो बारिश मेरी पसंदीदा चीज है।”

मीरा ने छाता उसकी तरफ बढ़ाया और कहा, “तो फिर चलें?”

आरव उसके साथ चल पड़ा।

दोनों उसी रास्ते पर चल रहे थे जहाँ उनकी कहानी चार साल पहले शुरू हुई थी।

इस बार उनके बीच कोई डर नहीं था।

कोई दूरी नहीं थी।

सिर्फ चार साल की अधूरी बातें थीं जिन्हें दोनों फिर से पूरा करना चाहते थे।

आरव ने चलते हुए पूछा, “तुमने मुझे कभी भुलाया था?”

मीरा ने मुस्कुराकर कहा, “नहीं।”

“फिर कभी फोन क्यों नहीं किया?”

मीरा कुछ देर चुप रही और बोली, “क्योंकि मुझे लगा था कि शायद तुम अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुके हो।”

आरव ने कहा, “मैं आगे बढ़ा था, लेकिन तुम्हें पीछे छोड़कर नहीं।”

मीरा ने उसकी तरफ देखा।

उसकी आँखों में वही पुरानी मुस्कान थी।

बारिश अब और तेज हो चुकी थी।

लेकिन इस बार दोनों को किसी बस का इंतजार नहीं था।

उन्हें कहीं जाना भी नहीं था।

वे बस चलते रहे।

क्योंकि कुछ मुलाकातें किस्मत लिखती है और कुछ रिश्ते वक्त की परीक्षा के बाद भी वहीं खड़े मिलते हैं जहाँ उन्हें छोड़ा गया था।

आरव और मीरा की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी।

उनकी पहली मुलाकात बारिश में हुई थी।

उनका प्यार बारिश में शुरू हुआ था।

और चार साल बाद उनकी अधूरी कहानी फिर उसी बारिश में पूरी हो गई।

शायद यही सच्ची मोहब्बत है।

जो दूरी से खत्म नहीं होती।

जो समय से मिटती नहीं।

और जिसे एक छोटी-सी बारिश भी फिर से जिंदा कर देती है।



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